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शनिवार, 4 अगस्त 2012

जीवित मुर्दों की लाशों को कफ़न कौन ओढाये?

कोलाहलों का वटवृक्ष
नीर का क्षीरसागर
जीवन्तता की अचेतावस्था
जैसे कूंडों में दही जमी हो
और खाने वाला कोई ना हो
फिर कौन तो तवे पर रोटी बनाये
और कौन किसे लोरी सुनाये
यहाँ कब्रिस्तान की ख़ामोशी होती
तो सह भी ली जाती
मगर
जीवित मुर्दों की लाशों को कफ़न कौन ओढाये?

24 टिप्‍पणियां:

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत मार्मिक वंदना जी..

शिवनाथ कुमार ने कहा…

जब विचार जम जाए तो फिर जीवंतता तो मृतप्राय ही है ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बड़े विरोधाभासी भाव में लिखी है ... विचारणीय प्रस्तुति

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

एंकाकीपन तब ज्यादा अखरता है जब अपने भी पराये जैसे लगने लगते हैं...बहुत सुन्दर शब्दों में अपने भावो को मुकेरा है बधाई।

Rajesh Kumari ने कहा…

जीवित मुर्दों को कफ़न कौन उढाये ...बहुत गहन प्रस्तुति जबरदस्त कटाक्ष

कुश्वंश ने कहा…

आक्रोशित बिम्बों का बेहतरीन प्रयाग किया है आपने बधाई

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

यथार्थवादी कविता ...

सदा ने कहा…

सार्थकता लिए सटीक अभिव्‍यक्ति ... आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (05-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Anti Virus ने कहा…

आदर्श परिस्थिति जगत में कहीं नहीं है. समझौता करना ही समझदारी है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि हर मुर्दा औरों के सहारे जीना चाहता है।

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

rukna maut gati jeewan hai.rukne se sadandh aane lagti hai...bicharon ka bhee prabah jaruri hai...bheed me tanhai bahud hee dukhad hai...aapke aaderneeya rashmi jee ke sampadan me prakashit sangrah ke liye hardikk badhayee

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

अदभुद... क्रन्तिकारी रचना

India Darpan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

जाने क्या क्या छुपा है इस रचना के अन्दर....

सादर...

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

Dr Varsha Singh ने कहा…

NICE ONE....

HAPPY FRIENDSHIP DAY....!!!!!!!

ऋता शेखर मधु ने कहा…

जीवित मुर्दों के बीच शायद कोई जिंदा निकल आए कफन ओढ़ाने के लिए !!

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

Rakesh Kumar ने कहा…

क्या कहूँ ?
बस मौन रहना ही अच्छा है.

अनुपम झकझोरती हुई प्रस्तुति.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

kafan bhee bikne laga hai aaj

रश्मि प्रभा... ने कहा…

सब तो लाश ही हैं , जिंदा ....

neelam chand sankhla ने कहा…

sunder kavita